आँखे न पढ़ सके तुम . . .

आँखे न पढ़ सके तुम मेरी, हर पहलू इसमे लिखा था तेरी हर बेवफाई का, आसुंओं का कतरा इसमे छिपा था। पढ़े - जुल्म क्यों सहती हो तु...
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आए नही तुम . . .

आए नही तुम, हर वक्त मिलने का वक्त दिया पढ़े - इश्क के बाज़ार में . . . सही वक्त कह कर पढ़े - इश्क के दहलीज़ पे . . . पर ना जाने ...
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तुमसे मिलना तो था . . .

तुमसे मिलना तो था पर अब नही मिल पाउँगा, तुमसे आँखे नही चार कर पाउँगा। पढ़े -  दिल ये हमारा क्यों जलता है जो कस्मे खाएं थे कि हर वादा निभ...
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