देह मत देना . . .

कह गए दिनकर जी- पुष्प ही नही अलम्, फल भी जनना पड़ता है, जो भी करती प्रेम, उन्हें माता भी बनना पड़ता है। प्रेम करने में यदि तुम बन जाओगे ...
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बून्द और सागर

बून्द जो गिरा सागर के तट पर बनकर उभरा एक बुलबुला। मन के उल्लास से उड़ता हुआ तैर निकला जग सारा।। क्या किस्मत है एक बुलबुले की जो सागर के ...
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इश्क में अब...

माना की गुनाह-ए-इश्क किया था, पर अब हमसे कोई गुनाह नही होगा, इश्क में हमे कोई सजा नही होगी, पढ़े - देर कर दी तुमने दिया था जो त...
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देर कर दी तुमने . . .

देर कर दी तुमने आने में, अब तो मैं रूठ चुका हूँ। बिन तेरे ऐ बेवफा, अब तो मैं टूट चूका हूँ। पढ़े - माँ बहुत रोई थी तेरा देर से आने की...
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ईर्ष्या की ईट से...

स्वार्थ और मैली मन की ईट से ईर्ष्या और अशुद्ध विचारो का महल बनाया, काम क्रोध और लोभ मोह से इसको चौतरफा  खूब सजाया। पढ़े - तू नारी...
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माँ बहुत रोई थी...

माँ बहुत रोई थी जब उन्हें बाँझ कहा गया था माँ तब भी रोई थी जब बेटे ने पेट में लात मारा था माँ तब भी रोई थी जब बेटा बुखार में तरप रहा ...
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अपने रंग में मोहे...

अपने रंग में मोहे रंग लो सजन, ले चलो मुझे प्रेम-प्रित की नगर। दिल से दिल की बात करो, रंग खुशियो का..... मुझपे बौछार करो। पढ़े - ये कुर्...
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आज उनके गली से...

आज उनके गली से गुजरते हुए, मन में आया हजारो सवाल, सोचा एक बार रूबरू होकर, पूछूँ उनसे बस एक सवाल, पढ़े - मेरे कब्र के पास  कि...
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स्वेत लहर अब बहुत हुआ..

स्वेत लहर अब बहुत हुआ, तुफानो का बवंडर अब भेजिए। वीर नंदन अभीनंदन जैसा, बस दो-चार जवान को सिमा पार करने दिजिए। पढ़े - इजहार हो न पाया अब...
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