दिन कुछ . . .

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे एहसान उतारता है कोई आईना देख के तसल्ली हुई हम को इस घर में जानता है कोई पक गया है शज़र पे फल श...
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कुछ अन कहीं बाते . . .

ऑपरेशन थयेटर में जब कोई अपना पास नही था मेरे,  तो जोर से उस सिस्टर का हाथ पकड़र के इतना ही बोल सकी के,  मेरा हाथ जोरो से पकड़ सकते...
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हमसफर . . .

हमसफर मैं मुख मोडती कैसे। साथ तेरा मैं छोडती कैसे। अंतिम साँसों तक का वादा था, बता मैं वादा तोडती कैसे,, कदम मिला के त...
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