आओ बैठें . . .

आओ बैठें . . . कभी मुझसे मेरी बात तो करके देखो.. पत्थर नहीं मोम हूं एक बार हाथ रख के तो देखो पूछने थे जो सवाल मुझसे दे चुकी अगर जवाब खुद...
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कन्या भ्रूण हत्या ..

मुझे वास्तविक जीवन पर आधारित कहानियां लिखना अच्छा लगता है । पर सब से पहेले में एक इंसान हूं । अपनी ज़िंदगी जीते हुए बहुत सारी ऐ...
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उड़ना ही है मुझे. . .

तंग हूँ , परेशां हूँ , दीमक लगी दीवारों से , हर रिश्ता सड़ांध भरा , घुटता हुआ , कुंठित सा है ....!! दो मुँहे साँपों जैसा , हर चेहरा...
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गुलज़ार ...

बस  एक  ही  सुर  में,  एक  ही  लय  पे   सुबह  से  देख,  देख  कैसे  बरस  रहा  है  उदास  पानी    फुहार  के  मलमली  दुपट्टे  से...
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