नारी तू नारायणी . . .

नारी तू नारायणी . . . नारी तू नारायणी, नारी तू नारायणी आज नहीं, कल से नहीं, आदिकाल से तारिणी नारी तू नारायणी, नारी तू नारायणी सृष्टि की र...
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आस्था . . .

आस्था . . . मन में ख़ुशियाँ भर देती है आस्था निर्मल , शीतल कर देती है आस्था मुसीबत में हिम्मत देती है आस्था ये आस्था ही है, जो मृत्यु ...
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मानव मुल्य . . .

मानव मुल्य . . . एक एक करते गए भरते गए भंडार मन ना शीतल कर पाए पाया धन अपार पाया धन अपार जो पड़ा रहा बेकार पाते जो केवल निर्मल मन ओर श...
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मधुर वाणी . . .

मधुर वाणी . . . बात ये है जानी मानी सबको आकर्षित करती है मधुर वाणी कहती थी मुझसे ये मेरी नानी बेटी सदा ही रखना अपनी मधुर वाणी बाक़ी सब...
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शिष्टाचार . . .

शिष्टाचार . . . सुबह सवेरे जल्दी उठना उठकर प्रभु का स्मरण करना बड़ों  के चरणो में नित्य प्रणाम यही कहलाता शिष्टाचार विदयालय को मंदिर मान...
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हँसी . . .

हँसी . . . हँसी है एक ऐसा धन जिसका हो नहीं सकता वर्णन हँसी में है एक ताक़त जैसी तन में ज़ो भर दे स्फूर्ति हँसी है जैसे निर्मल पानी हँसी ...
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संस्कार . . .

संस्कार . . . केसा है यह संसार केसे पायें एसका आधार उतार ना सकेंगे हम कभी एस संसार का उपकार जिसमें जन्म ले पाया हमने जीवन जीने का संस्...
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अनुशासन . . .

अनुशासन . . . अनुशासन है ऐसा हथियार जिसकी सबसे तेज है धार अनुशासन को जो अपनाता उसकी होती नैया पार नहीं है रुकता काम कोई फिर ख़ुशीयाँ म...
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आकाँशा . . .

मन में रहती है हमेशा सबके छुपी कोई एक आकाँशा अपनी अपनी उम्र के अनुसार हम केवल ओर केवल पाना चाहे सबका प्यार कुछ ऐसे भी है जिन्हें चाहिए बस...
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है पंख नहीं मेरे . . .

है पंख नहीं मेरे, मैं आसमान में उड़ती हूँ! है पंख नहीं मेरे लेकिन मै आसमान में उड़ती हूँ माना काली है रात बहुत मै ख्याब सुनहरे बुनती ह...
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हिम्मत . . .

हिम्मत . . . डरना नहीं , तुम झुकना नहीं दुखो से कभी घबराना नहीं तुम हो ईश्वर क़ी परम कृती बस आगे बड़ते ही जाना माना अभी दुःख क़ी बदली ह...
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देश प्रेम . . .

देश प्रेम . . . एक युवा क़ी आँखो मे मैंने फिर मौत क़ा जज़्बा देखा है फिर देश प्रेम पे मिटने खातीर उस ज़ोश का रुतबा देखा है बचपन से ख...
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हाँ मैं बिहार हुँ . . . 4

हाँ मैं बिहार हुँ . . . विद्यापति जी क़ी वाणी हूँ मै महादेव को जिसने जीत लिया कैलास त्याग एस भूमी पर रहने को शिव को विवश किया उस कलम ...
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हाँ मैं बिहार हुँ . . . 3

हाँ मैं बिहार हुँ . . . चढते सूरज को पूजे संसार मैं डलते रवि को नमन करूँ मैं साफ़ ओर सुंदर घाट बना सब रोग क्लेश को दूर करूँ मान, सम्मा...
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हाँ मैं बिहार हुँ . . . 2

हाँ मैं बिहार हुँ . . . कोई कहे अल्लाह बड़े, कोई कहे श्री राम कोई कहे ईसा सही, कोई कहे सतनाम धर्म सभी है एक से, कोई ना उनमे भेद गंगा...
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हाँ मैं बिहार हुँ . . . 1

हाँ मैं बिहार हुँ . . . मैं देबघर क़ी शिव गंगा हो जाता तृष्णा से मोह भंगा है तेज ईतना ईस भूमी में रावण भी जहाँ पर हार गया भोले को ले...
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