मनचला भवरा . . .

बगिया में एक फूल खिला था दिल उसका भवरे से जुड़ा था पढ़े - जल रही बिखर रही . . . पर वो भवरा तो मनचला था डाली डाली फिरता फिरा...
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जल रही बिखर रही . . .

जल रही बिखर  रही टुकड़ों का हिसाब नहीं कोई पास नही मेरे और कोई आस नहीं पढ़े - फिर तरुवर तुम्हें क्यों अहंकार . . . रिस्ते नाते सब...
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