एकही बार परखिये ना

एकही बार परखिये ना वा बारम्बार । बालू तो हू किरकिरी जो छानै सौ बार॥ अर्थ: किसी व्यक्ति को बस ठीक ठीक एक बार ही परख लो तो उसे बार बार...
Read More

हीरा परखै जौहरी

हीरा परखै जौहरी शब्दहि परखै साध । कबीर परखै साध को ताका मता अगाध ॥ अर्थ: हीरे की परख जौहरी जानता है – शब्द के सार– असार को परखने वाल...
Read More

देह धरे का दंड है

देह धरे का दंड है सब काहू को होय । ज्ञानी भुगते ज्ञान से अज्ञानी भुगते रोय॥ अर्थ: देह धारण करने का दंड – भोग या प्रारब्ध निश्चित है ...
Read More

मन मैला तन ऊजला

मन मैला तन ऊजला बगुला कपटी अंग । तासों तो कौआ भला तन मन एकही रंग ॥ अर्थ: बगुले का शरीर तो उज्जवल है पर मन काला – कपट से भरा है – उसस...
Read More

इस पोस्ट पर साझा करें

| Designed by Techie Desk