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एक घंटा . . .
(प्लेटफॉर्म पर रुकी ट्रेन)


अचानक एक सी...सी.....सी..आवाज के साथ ट्रेन रुकती है
किसी स्टेशन पर, अफसोस अभी हमें इस स्टेशन का नाम नहीं पता,ये दिखने में छोटा-सा स्टेशन है
लेकिन हम ये नहीं जान पा रहे हैं, कि एक सुपरफास्ट ट्रेन आखिर इतने छोटे स्टेशन में क्यूं रुक गई?
मैंने खिड़की से झांका तो पता चला ये शिवरामपुर स्टेशन है।
हम दोनों यानी कि मैं और मेरा दोस्त मनोज दोनों खिड़की से बाहर देख रहे सब एक ओर तेजी से दौड़े जा रहे हैं, हमारे अन्दर तेजी से जिज्ञासा उत्पन्न हुई हम दोनों ट्रेन के आगे वाले हिस्से की ओर पहुंचे, हमने देखा एक लड़की और लड़की दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़े ट्रेन के इंजन के सामने खड़े हैं। लोगों की भीड़ बढ़ गई है जैसे कोई फिल्म की शूटिंग चल रही हो,
शोरगुल में कुछ ठीक से सुनाई नहीं दे रहा है कि वहां क्या बातें हो रही हैं?
वहीं एक सज्जन खड़े थे उनसे पूछा,
"क्या आपको कुछ पता है वहां क्या हो रहा है"
बेटा मेरे कुछ समझ नहीं आ रहा वहां क्या हो रहा है?
हमने किसी तरह थोड़ा पता लगाया,तो लोगों ने बताया कि ये एक दूसरे से प्रेम करते हैं और घरवाले राजी नहीं हुए तो दोनों ने आत्म हत्या का फैसला किया है। कुछ देर के लिए तो मैं भी सन्न रह गया कि इतना खूबसूरत जीवन है लोग जीना नहीं चाहते। बस इसलिए कि एक ये दूसरे से प्रेम करते हैं, और एक दूसरे के बिना इनको लगता है हम अधूरे हैं।
किसी तरह भीड़ को किनारे करते हुए हम उनके पास पहुंचे और लड़के के कंधे पर मैंने हाथ रखा और
पूछा,
क्या बात है भाई तुम आत्म हत्या क्यूं करना चाहते हो ?
उसने रोते हुए वेदना पूर्ण आवाज में मुझसे कहा, हम दोनों एक दूसरे से सच्चा प्रेम करते हैं और हम दोनों की जाति अलग है सिर्फ इसलिए ये लोग हमारे प्रेम को ठुकरा रहे हैं। तो मैंने उस लड़की की तरफ देखा तो मेरी आंखें भर आईं, उसका शरीर कांप रहा था शायद उसके आंसू सूख गए थे।
शायद वो दोनों जीना चाहते थे लेकिन जातिवाद और रूढ़िवादिता से ग्रस्त इस समाज ने उनकी हिम्मत तोड़ दी और आज वो दोनों मौत को गले लगाना चाहते हैं, अगर कोई किसी वजह से आत्महत्या करता है तो उसका खुद का कसूर माना जाता है, लेकिन अगर कोई प्रेमी जोड़ा आत्महत्या करता है तो मेरा मत ये है कि ये पूरी सम्पूर्ण मनुष्य जाति पर श्राप है कि मनुष्य ने अपनी कुमानसिकता और क्रूरता के आगोश में मनुष्य को मनुष्य नहीं समझा।
पुलिस आती दिखाई देती है और सब अपने अपने डिब्बे में जाकर बैठ जाते हैं, और वहीं से झांककर सब कुछ देखते हैं पहले पुलिस दोनों को खूब समझाती है और फिर थाने ले जाती है। लेकिन उस रोज मैंने उन दोनों प्रेमियों में एक जिद्द और बगावत की आग देखी और यह अनुमान लगाया कि सच्चे प्रेम की ज़िद और बगावत की आग सामाज आगे समाज के हर बंधन को जलाकर खाक कर देती है जो प्रेम के बीच आता है। और फिर सच्चे प्रेम और बगावत के आगे कुमानसिकता, और जातिवादिता को हारना पड़ता है और बगावत से ही समाज मे बदलाव सम्भव है।
पूरे एक घंटा ट्रेन उस स्टेशन पर रुकी रही और वो एक घंटा मेरी जिंदगी का सबसे यादगार पल था। जो भूल चूक से मुझे मिला। फिर उस रोज हम अपने घर चले आये और अखबार के माध्यम से पता चला कि दोनों की शादी उनके घरवालों की मौजूदगी में कानून के मुताबिक हुई। मुझे काफी खुशी हुई कि चलो कुछ तो अच्छा हुआ। समाज हम सब लोगों से मिलके ही बनता है और समाज में व्याप्त प्रथाएं, कुप्रथाएं सब मिलकर हम ही बनाते हैं, हर प्रथा कुप्रथा तब बनती है जब समय के अनुरूप परिवर्तन नहीं करती।
आज भी देश में समाज जाति वादिता से ग्रस्त है इसलिए सबको पहल करनी चाहिए इस समाज में जाति से बढके इंसान हैं। इंसान ने जाति का निर्माण किया न कि जाति ने इंसान बनाया। इसलिए समाज को अन्तर्जातीय विवाह को अपनाना चाहिए।


Anurag Maurya


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