यूँ नज़रें झुकाया न करो,
पलको से आँखों को चुराया न करो...

अपनी शर्मिली अदाओं से हमे पागल बनाया  न करो,
सर्द रातो में यूँ ही ओस की बूंद बन कर आया न करो...

तेरी खुली आँखे है ये  मैखाना ,
यूँ अपनी अदाओं से हमे, बहकाया न करो,

हर पल ख्वाबों में मेरे आया न करो,
यूं ही मेरी निंदो को उराया न करो,

मोहब्बत है हमे आपसे,
यूँ हमे हर वक्त आजमाया न करो...

Shubham Poddar

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