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           पानी पूरी से शुरू हुई लव स्टोरी कहा तक पहोच ने वाली थी किसे पता था।
         कॉलेज में आलोक नाम का एक लड़का पढ़ता था। कॉलेज में नई नई entry... हुई थी। वो इतना खुश रहेंता था की पूरी क्लास उसके वजह से खुश रहेंती थी। हमेशा वो हसी मजाक करता था। लेकिन कुछ दिन से वो कुछ उदास रहने लगा था। collage ... में  सब से cool... रहने वाला लड़के को प्यार हो गया था।

मिलने  की खवाईश... (भाग - १ )  ---  मिलने की खवाईश.... (भाग - २ )   ---  मिलने की  खवाईश... ( भाग - ३ ) 

 
         उसके प्यार की कहानी पानी पूरी से शुरू हुई थी। Collage... में इतनी सारी खुसुरत लड़कियां थी पर.. पड़ोस में रहने वाला उसका एक दोस्त के घर उसके मामा की लड़की वहा पर आईं हुई थी। उस दिन दोस्त ने आलोक को अपने घर पानी पूरी खाने के लिए बुलाया था। जितनी खूबसूरत थी उतना ही खूसूरत उसका नाम "शिखा" । आलोक अपने दोस्त के घर पर गया। पानी पूरी आलोक की favorite थी। सारी पानी पूरी ख़तम हो गई। तब शिखा उपर से कमरे से नीचे आई। आ ते ही देखा कि उसके हिस्से की एक भी पानी पूरी बची नहीं थी। अपना पैर ज़ोर से ज़मीन पर पटकते हुए गुस्से में बोली : " मेरे हिस्से की पानी पूरी कौन खा गया"। आलोक तो शिखा को देखता ही रह गया था। शिखा से ख़ूबसूरत लड़की आज तक आलोक ने देखी नहीं थी। आलोक की निगाहें शिखा को देखती रह गई। अपने मन में यही कहा -


" मेरी दीवानगी की कोई हद नहीं,
तेरी सूरत के सिवा मुझे कुछ याद नहीं,
मैं गुलाब हूँ तेरे गुलशन का,
तेरे सिवाए मुझपर किसी का हक्क नहीं.."

मिलने  की खवाईश... (भाग - १ )  ---  मिलने की खवाईश.... (भाग - २ )   ---  मिलने की  खवाईश... ( भाग - ३ ) 


       आलोक गलती से शिखा के हिस्से की पानी पूरी खा गया था। अपनी गलती मानते हुए आलोक ने धीरे से बोलो:" sorry... आप के हिस्से की पानी पूरी में खा गया।" बिना कुछ बोले शिखा अपने कमरे में चली गई। वो अपने मामा के यहां १५ दिनों के लिए आई थी। फ़िर थोड़ी देर बाद नीचे मरे पास आ के बोली : " आपके घर पर
iron... है क्या ? मुझे अपने कपड़ों की ironing... करनी है। आलोक अपने स्वभाव के अनुरूप मजाकिया अंदाज में कुछ ऐसा कहा कि शिखा हस पड़ी। फिर शिखा ने हसते हुए कहा please... मुझे दीजी ये कपड़ों प्रेस करना है। वो आलोक और शिखा की पहेली मुलाक़ात हुई थी। बस वहीं से आलोक और शिखा की दोस्ती हो गई थी। 

वो निगाह उनकी मजाज थी,
 कभी झुक गई कभी उठ गई,,
 तो "जनाब" हमसे ये हुआ,
कभी जी उठे कभी मर गए।

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